बरसात के मौसम में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। आवक लगभग 50 प्रतिशत घटने के कारण ग्राहकों को सब्जियां दोगुनी कीमत पर खरीदनी पड़ रही हैं। लेकिन इतनी महंगी सब्जियां बिकने के बावजूद उनकी स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा कितनी सुनिश्चित की जा रही है, यह सवाल चिंचवड़ स्थित चाफेकर चौक सब्जी मंडी की स्थिति देखने के बाद उठ रहा है।
पिछले सप्ताह हुई भारी बारिश के कारण मंडी में बड़ी मात्रा में पानी भर गया था। इससे कीचड़, गाद और सड़ी-गली सब्जियां जमा हो गईं। व्यापारियों ने अपने खर्च पर मंडी की सफाई कर गंदगी हटाई, लेकिन वही गंदगी , सड़ी हुई सब्जियां और कचरा मंडी के एक कोने में ढेर के रूप में डाल दिया गया। इसके कारण पूरे परिसर में तेज दुर्गंध फैल गई है और इसी अस्वच्छ वातावरण में सब्जियों की बिक्री जारी है।
मंडी परिसर में प्याज के छिलके, सड़ी हुई सब्जियां, प्लास्टिक का कचरा और गंदा पानी जमा दिखाई दे रहा है। इस कचरे पर बड़ी संख्या में मक्खियां, मच्छर और अन्य कीट मंडरा रहे हैं, जिससे खुले में रखी सब्जियों के दूषित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्राहक अपने परिवार के लिए ताजी और सुरक्षित सब्जियां खरीदने मंडी आते हैं, लेकिन ऐसे अस्वच्छ माहौल में बिक रही सब्जियों की गुणवत्ता को लेकर उनके मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
बरसात के मौसम में नमी के कारण सड़ने वाले जैविक कचरे में बैक्टीरिया, फफूंद और अन्य सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं। ऐसे वातावरण में रखी गई सब्जियां दूषित होने का खतरा अधिक रहता है। यदि इन्हें अच्छी तरह साफ किए बिना या दूषित अवस्था में खाया जाए, तो पेट संबंधी बीमारियां, खाद्य जनित संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
वर्तमान में सब्जियों की कम आवक का हवाला देते हुए अधिकांश सब्जियों के दाम काफी बढ़ा दिए गए हैं। ग्राहक भी बढ़ी हुई कीमत चुकाकर सब्जियां खरीद रहे हैं। ऐसे में केवल महंगी सब्जियां बेचना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी स्वच्छ तरीके से संभाल, कचरे का समय पर निपटान, बिक्री स्थल की नियमित सफाई तथा खाद्य सुरक्षा के मूलभूत मानकों का पालन करना भी विक्रेताओं की जिम्मेदारी है।
ग्राहकों को केवल ताजी दिखने वाली नहीं, बल्कि स्वच्छ और सुरक्षित सब्जियां मिलना उनका मूलभूत अधिकार है। यदि बढ़ी हुई कीमत वसूलने के बावजूद मंडी में स्वच्छता का उचित ध्यान नहीं रखा जाता, तो यह ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ समझौता माना जाएगा। इसलिए आवश्यक है कि सब्जी विक्रेता स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें तथा ग्राहकों का विश्वास बनाए रखें।यदि चाहें, मैं इसे अखबार की रिपोर्टिंग शैली में और अधिक प्रभावशाली तथा प्रोफेशनल हिंदी में भी तैयार कर सकता हूँ।


