चिंचवड, 14 दिसंबर :
नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही प्रभाग क्रमांक 25 में राजनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। साप्ताहिक ‘मर्द महाराष्ट्र’ के संपादक और ताथवडे ग्राम पंचायत के पूर्व सदस्य रामचंद्र मारुति गायकवाड़ की चुनावी इच्छुकता के कारण इस प्रभाग की राजनीति को एक नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है। अब तक पार्टी के दम पर चलने वाला चुनावी माहौल व्यक्तित्व, कार्य और विश्वास के इर्द-गिर्द केंद्रित होने की संभावना बढ़ती नजर आ रही है।
25 वर्षों की पत्रकारिता; जनता के मुद्दों की पाठशाला
पिछले करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रामचंद्र गायकवाड़ ने पत्रकारिता को केवल समाचार तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे जनता की समस्याओं को उठाने का मंच बनाया। सड़क, पानी, बिजली, अतिक्रमण, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं के मुद्दे और वंचित वर्गों की समस्याएँ उन्होंने लगातार सामने रखीं। इसी निरंतर संपर्क के कारण वे प्रभाग के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच बना सके, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।
सादगी ही पहचान, जनता से जुड़ा नेतृत्व
राजनीति में दिखावे, बड़े खर्च और विशाल सभाओं की बजाय सादगी, सीधा संवाद और समय पर मदद—यही गायकवाड़ की कार्यशैली रही है। आम नागरिकों के बीच “हमारा ही आदमी” की छवि बनना किसी भी चुनाव में निर्णायक होता है, और यह पहचान गायकवाड़ ने वर्षों के कार्य से अर्जित की है।
मामूली हार, लेकिन हौसला कायम
पिछले चुनाव में उनकी पत्नी चुनाव मैदान में उतरी थीं और कड़े मुकाबले में उन्हें मामूली हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इस हार के बाद भी गायकवाड़ परिवार ने सामाजिक कार्य से दूरी नहीं बनाई। चुनाव खत्म होने के बाद भी जनता से संपर्क बनाए रखना उनकी विश्वसनीयता को और मजबूत करता गया।
सभी दलों से संपर्क
एक पत्रकार के रूप में गायकवाड़ के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अच्छे संबंध हैं। लेकिन आम धारणा यह है कि इन संबंधों का उपयोग सत्ता के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए किया गया। इसी कारण उन्हें किसी एक पार्टी तक सीमित न मानकर स्वतंत्र सोच और निर्णय लेने वाले व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।
मजबूत और शांत वोटबैंक
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार गायकवाड़ की असली ताकत उनका मजबूत और शांत वोटबैंक है। यह किसी एक जाति, वर्ग या समूह तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों में फैला हुआ है। यही कारण है कि पारंपरिक पार्टी समीकरणों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
‘पार्टी नहीं, व्यक्ति’ की लड़ाई?
प्रभाग 25 के मतदाताओं में यह भावना मजबूत हो रही है कि “जो लगातार समाज के लिए काम करता है, उसे ही मौका मिलना चाहिए।” ऐसे में आने वाला चुनाव पार्टी घोषणाओं से अधिक उम्मीदवार के कार्य और भरोसे पर आधारित होने की संभावना जताई जा रही है। इस परिदृश्य में रामचंद्र गायकवाड़ की सक्रियता ने सभी राजनीतिक दलों को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है।
बदलते समीकरण, निर्णायक समय
फिलहाल शांत दिखाई देने वाला प्रभाग क्रमांक 25 आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बनने की संभावना रखता है। रामचंद्र मारुति गायकवाड़ के निर्णय से राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह चुनाव केवल नतीजों तक सीमित न रहकर, स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।


