छुट्टी के दिनों में गणेश कस्पटे का सोसायटी बैठकों का जोरदार अभियान

छुट्टी के दिनों में गणेश कस्पटे का सोसायटी बैठकों का जोरदार अभियान

35 से अधिक सोसायटियों में संवाद; नागरिकों की ओर से मिल रहा उत्स्फूर्त समर्थन

 

वाकड | 24 दिसंबर: शनिवार–रविवार की छुट्टियों का लाभ उठाते हुए भाजपा के इच्छुक उम्मीदवार गणेश कस्पटे ने वार्ड क्रमांक 26 में 35 से अधिक हाउसिंग सोसायटियों में सीधा संवाद स्थापित करते हुए बैठकों की श्रृंखला आयोजित की, जिसे नागरिकों से अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इन बैठकों में सोसायटी प्रतिनिधि, युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और कस्पटे के विचारों व विकास दृष्टि को समर्थन दिया।

इन बैठकों के दौरान गणेश कस्पटे ने स्पष्ट रूप से कहा कि “किसने क्या किया, इस पर चर्चा करने से ज्यादा ज़रूरी है कि आने वाले वर्षों में हम वार्ड के लिए क्या करने जा रहे हैं।”

उन्होंने आरोप–प्रत्यारोप या बीते हुए राजनीतिक मुद्दों की बजाय भविष्य की योजना, सतत विकास और मूलभूत सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया। यातायात व्यवस्था, जलापूर्ति, स्वच्छता, सुरक्षा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुविधाएं, महिला एवं युवाओं के लिए विशेष कार्यक्रम, हरित परिसर तथा सुनियोजित विकास को लेकर कस्पटे ने एक स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया। उनकी शांत, संयमित और दूरदर्शी प्रस्तुति से कई सोसायटी प्रतिनिधियों ने संतोष व्यक्त किया।

विशेष रूप से इन बैठकों में नागरिकों ने खुलकर प्रश्न पूछे, सुझाव दिए और अपनी समस्याएं सामने रखीं। हर सवाल को ध्यानपूर्वक सुनकर संयम और ठोस उत्तर देने की उनकी नेतृत्व शैली को ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया गया।

 

कई सोसायटी प्रतिनिधियों ने कहा कि “अब तक आपने बिना किसी पद के जो काम किया है, उसे देखकर यह भरोसा होता है कि यदि आपको जनप्रतिनिधि बनने का अवसर मिला, तो वार्ड में निश्चित रूप से बड़ा बदलाव आएगा।” साथ ही, “आने वाले समय में हम निश्चित रूप से आपके साथ खड़े रहेंगे,” ऐसा भरोसा भी अनेक नागरिकों ने जताया।

इन बैठकों के माध्यमसे गणेश कस्पटे की काम के आधार पर बनी छवि, स्पष्ट विज़न और जनता से सीधा संवाद करने वाली नेतृत्व क्षमता और अधिक मजबूत होकर सामने आई है। इसके चलते वार्ड क्रमांक 26 में उनके प्रति सकारात्मक माहौल और सशक्त हुआ है, तथा भाजपा की ओर से उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना और अधिक प्रबल हुई है, ऐसा राजनीतिक हलकों में चर्चा है।

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