मासिक धर्म को लेकर जागरूकता के साथ सार्वजनिक शौचालयों और इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था भी जरूरी
पिंपरी-चिंचवड़, 15 अक्टूबर : नवरात्रि के अवसर पर हर जगह देवी की आराधना की जा रही है। महिला शक्ति का सम्मान और महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया जा रहा है। लेकिन इसी बीच महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मासिक धर्म के मुद्दों पर कितना ध्यान दिया जा रहा है, यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है। मासिक धर्म को लेकर जागरूकता बढ़ रही है, लेकिन आज भी सामाजिक गलत धारणाएं, सार्वजनिक शौचालयों की कमी और इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड के सही निपटान जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। ऐसे में देवी की आराधना के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
जागरूकता बढ़ी, लेकिन झिझक अब भी कायम
मासिक धर्म महिलाओं के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसके बावजूद कई परिवारों में आज भी इस विषय पर खुलकर बात नहीं की जाती। कुछ जगहों पर मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ में शामिल होने, मंदिर या पूजा घर में जाने और रसोई में काम करने से रोका जाता है। शिक्षा, सोशल मीडिया और जागरूकता अभियानों के कारण युवा पीढ़ी की सोच में बदलाव आ रहा है, लेकिन पुरानी धारणाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना, सैनिटरी पैड को समय पर बदलना और स्वच्छता के लिए सुरक्षित साधनों का इस्तेमाल करना जरूरी है। इस विषय पर केवल लड़कियों को ही नहीं, बल्कि लड़कों को भी सही जानकारी देना आवश्यक है। मासिक धर्म शर्म या संकोच का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। यह समझ समाज में विकसित करना जरूरी है।
सार्वजनिक शौचालयों की कमी से महिलाओं को परेशानी
शहर के बाजारों, बस स्टैंड, सार्वजनिक कार्यक्रमों के स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में साफ-सुथरे और सुरक्षित शौचालयों की उपलब्धता जरूरी है। इन स्थानों पर पानी की सुविधा और सैनिटरी पैड बदलने के लिए उचित जगह होनी चाहिए। लेकिन कई जगहों पर गंदगी, पानी की कमी, कूड़ेदान का अभाव और उचित सुविधाएं नहीं होने के कारण महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
नवरात्रि के दौरान सार्वजनिक स्थानों और धार्मिक कार्यक्रमों में महिलाओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में स्वच्छ शौचालयों और जरूरी सुविधाओं की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। संबंधित प्रशासन को इन सुविधाओं की उपलब्धता और नियमित सफाई पर ध्यान देना चाहिए।
सैनिटरी पैड का सही निपटान भी जरूरी
सैनिटरी पैड का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ही उनके सुरक्षित निपटान का सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है। इस्तेमाल किए गए पैड को खुले में फेंकने या शौचालय में बहाने से गंदगी फैल सकती है और नालियों में रुकावट आ सकती है।
इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड को कागज में लपेटकर स्थानीय कचरा प्रबंधन के नियमों के अनुसार उचित कूड़ेदान में डालना चाहिए। सार्वजनिक शौचालयों में सैनिटरी पैड के निपटान के लिए अलग कूड़ेदान और सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इससे स्वच्छता बनाए रखने के साथ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।
देवी की आराधना के साथ स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी जरूरी
नवरात्रि में महिला शक्ति का सम्मान करते समय महिलाओं के स्वास्थ्य, स्वच्छता और सम्मान को भी प्राथमिकता देना जरूरी है। स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना, सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छ शौचालय उपलब्ध कराना, सैनिटरी पैड के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था करना और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी बढ़ाना जैसे कदम महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
हर महिला को स्वास्थ्य सुविधाएं, स्वच्छता और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। मासिक धर्म को लेकर झिझक और गलत धारणाओं को दूर करना तथा महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर खुलकर चर्चा करना समय की जरूरत है। देवी की आराधना के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही महिला शक्ति के सम्मान का सच्चा संदेश है।


