दुनिया भर में जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अब एलपीजी गैस की कमी से पूरा विश्व परेशान हो गया है। छोटे-बड़े सभी होटल व्यवसाय प्रभावित हुए हैं। इसी बीच पुणे से एक राहत भरी खबर सामने आई है।
पुणे स्थित नेशनल केमिकल लेबोरेटरी (NCL) के वैज्ञानिकों ने एलपीजी गैस के विकल्प के रूप में ‘डायमिथाइल ईथर’ (DME) गैस का सफलतापूर्वक निर्माण किया है। इस गैस को विकसित करने के लिए वैज्ञानिक डॉ. तिरुलाई स्वामी राजा और उनकी टीम ने करीब 20 वर्षों तक शोध कर आवश्यक ‘उत्प्रेरक’ तैयार किया है।
इस उत्प्रेरक की मदद से व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन में भी सफलता मिली है। वर्तमान में पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रतिदिन लगभग 250 किलो गैस का उत्पादन किया जा रहा है। यदि विभिन्न औद्योगिक कंपनियों के साथ समझौते किए जाते हैं, तो बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हो सकता है, जिससे देश की कुल ईंधन जरूरत का 10 से 20 प्रतिशत तक हिस्सा पूरा किया जा सकता है।
इससे न केवल भारत की अन्य देशों पर गैस के लिए निर्भरता कम होगी, बल्कि इसकी कीमत भी एलपीजी गैस से कम होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में भविष्य में यह गैस एलपीजी का एक प्रभावी विकल्प बन सकती है और देश के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

